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देवभूमि परिवार पोर्टल लॉन्च, 2047 तक 28 लाख करोड़ की होगी उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था

  • विजन-2047 में 440 संकेतकों के आधार पर तय होंगे विकास के लक्ष्य
  • प्रत्येक परिवार को मिलेगी विशिष्ट डिजिटल आईडी

देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में ‘देवभूमि परिवार पोर्टल’ का शुभारंभ और ‘विकसित उत्तराखंड विजन-2047’ का विमोचन किया। सरकार का कहना है कि इन पहलों से सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाने, प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने और प्रदेश के दीर्घकालिक विकास को गति देने में मदद मिलेगी। विजन-2047 के तहत राज्य की अर्थव्यवस्था को लगभग 28 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की सफलता का वास्तविक पैमाना योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उनका लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाना है। जानकारी के अभाव में कई पात्र लोग सरकारी योजनाओं से वंचित रह जाते हैं। वहीं, विभिन्न विभागों में बार-बार दस्तावेज जमा करने की प्रक्रिया से भी नागरिकों को परेशानी होती है। देवभूमि परिवार पोर्टल के माध्यम से इन समस्याओं को कम कर सरकारी सेवाओं को सरल, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

प्रत्येक परिवार को मिलेगी डिजिटल आईडी

प्रमुख सचिव नियोजन डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम ने बताया कि पोर्टल के माध्यम से प्रदेश के परिवारों और उनके सदस्यों का एकीकृत डिजिटल डेटाबेस तैयार किया जाएगा। पंजीकरण के बाद प्रत्येक परिवार को विशिष्ट ‘देवभूमि परिवार आईडी’ दी जाएगी। इससे सरकारी योजनाओं के पात्र लाभार्थियों की पहचान, विभागों के बीच समन्वय और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में मदद मिलेगी।पोर्टल के जरिए लाभार्थियों की जरूरतों का आकलन, योजनाओं की निगरानी और बजट व सरकारी संसाधनों का बेहतर नियोजन भी संभव होगा। इसके संचालन के लिए राज्य स्तर पर ‘देवभूमि परिवार प्राधिकरण’ और जिला स्तर पर ‘जिला देवभूमि परिवार अधिकारी’ की व्यवस्था प्रस्तावित है।

अर्थव्यवस्था और रोजगार बढ़ाने का लक्ष्य

प्रमुख सचिव ने बताया कि ‘विकसित उत्तराखंड विजन-2047’ में लगभग 440 संकेतकों के आधार पर विभिन्न क्षेत्रों के लिए दीर्घकालिक लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। वर्ष 2047 तक प्रदेश की अर्थव्यवस्था को लगभग 28 लाख करोड़ रुपये और प्रति व्यक्ति आय को करीब 20 लाख रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य है। इसके साथ बेरोजगारी दर को 3.5 प्रतिशत और बहुआयामी गरीबी को 0.61 प्रतिशत तक कम करने की योजना है।

विजन में कृषि, पर्यटन, उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, कौशल विकास, कनेक्टिविटी और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दी गई है। राज्य की स्थापित ऊर्जा क्षमता को लगभग 22 हजार मेगावाट और वन आच्छादन को 46.6 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य भी रखा गया है। वर्ष 2030, 2035, 2040, 2047 और 2050 के लिए अलग-अलग लक्ष्य तय कर विभागीय कार्ययोजनाएं बनाने और नियमित समीक्षा पर जोर दिया गया है।

कनेक्टिविटी और पर्यटन पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प से प्रेरणा लेकर राज्य सरकार उत्तराखंड को देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करने के लिए काम कर रही है। दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना और चारधाम सड़क परियोजना से कनेक्टिविटी मजबूत हो रही है। केदारनाथ-बदरीनाथ पुनर्निर्माण, मानसखंड मंदिर माला मिशन और शीतकालीन यात्रा के माध्यम से पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि औद्योगिक निवेश, स्वरोजगार और स्टार्टअप को प्रोत्साहित करने के साथ ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ के माध्यम से स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है। महिलाओं को सरकारी सेवाओं में 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण और स्वयं सहायता समूहों के जरिए आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री के अनुसार, प्रदेश की तीन लाख से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं।

प्रकृति के साथ प्रगति पर जोर

मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले एक वर्ष में प्रदेश की जीएसडीपी में 7.23 प्रतिशत वृद्धि, प्रति व्यक्ति आय में 41 प्रतिशत वृद्धि और रिवर्स पलायन में 44 प्रतिशत बढ़ोतरी दर्ज की गई है। उन्होंने सीमांत क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं और स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ाने पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड का विकास मॉडल ‘प्रकृति के साथ प्रगति’ पर आधारित होना चाहिए। हिमालय, नदियों, वन संपदा और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के साथ आपदा प्रबंधन को भी प्राथमिकता देनी होगी। अधिकारियों को लक्ष्यों की नियमित समीक्षा और योजनाओं का समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी और खजान दास, विधायक सविता कपूर, मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, सेतु आयोग के सलाहकार दिनेश अग्रवाल और अन्य जनप्रतिनिधि व वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। विभिन्न जनपदों के जिलाधिकारी वर्चुअल माध्यम से जुड़े।

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